Subah-Shaam Jaap Karne Wala Ek Shreshth Bhakti Mantra

भक्ति और ध्यान का जीवन में महत्व अत्यंत विशेष होता है। जो व्यक्ति नित्य सुबह और शाम भक्ति में समर्पित रहते हैं , उनका मन और विचार हमेशा शुद्ध और शांत रहते हैं। भक्ति और मंत्र - जाप एक ऐसे माध्यम हैं जो हमारे मन को शुद्ध करते हैं और हमें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। हिंदू धर्म में अनेक पवित्र मंत्र हैं जो भक्ति और शक्ति का प्रतीक हैं। इनमें से एक विशेष मंत्र है जो राम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है : " रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥"   यह मंत्र न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि जीवन के अनेक पहलुओं में शांति , समृद्धि और उन्नति प्रदान करता है। इस लेख में हम जानेंगे कि सुबह - शाम मंत्र जाप का महत्व क्या है , इसका विधि - विवरण क्या है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। मंत्र जाप का महत्व भगवान का नाम जपना एक ऐसी क्रिया है जो हमारे मन और जीवन को नई ऊर्जा से भर देती है। मंत्र जाप करने स...

Kabir Ka Vyaktitv Evam Krtitv: Samaaj Ke Sudharak or Bhakti Ke Prateek

कबीर दास का नाम भारतीय संत साहित्य में अत्यधिक सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल एक महान कवि थे, बल्कि एक समर्पित संत भी थे जिन्होंने भक्ति, सामाजिक सुधार और मानवता की दिशा में एक नई सोच प्रस्तुत की। कबीर का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालता है। उनके विचार, उनके गीत और उनकी कविताएँ जीवन के सत्य, धार्मिक समरसता और मानवता के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में आज भी प्रासंगिक हैं।

कबीर का जीवन परिचय

कबीर का जन्म 1398 . के आसपास वाराणसी (अब बनारस) में हुआ था। उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, लेकिन उनके विचारों में तो हिंदू धर्म की सीमाएँ थीं और ही मुस्लिम धर्म की। वे एक सूफी संत के रूप में प्रसिद्ध हुए, जिन्होंने अपनी कविता और भक्ति से धार्मिक कट्टरता को चुनौती दी। कबीर की माता का नाम नीमा था और उनके पिता का नाम था कालू. कबीर ने बहुत कम उम्र में सांसारिक जीवन से विरक्त होकर भक्ति मार्ग को अपनाया।

कबीर का जीवन और उनकी रचनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि वे तो पूरी तरह से हिंदू थे, ही मुस्लिम। उनके विचारों में धार्मिक समरसता, मानवता और एकेश्वरवाद का संदेश था। उनकी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य था कि व्यक्ति को अपने अंदर की शक्ति को पहचानना चाहिए और सत्य की प्राप्ति के लिए सही मार्ग पर चलना चाहिए।

कबीर का व्यक्तित्व

कबीर का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, निश्कलंक और प्रखर था। वे तो बाहरी आडंबरों में विश्वास करते थे और ही किसी प्रकार के पाखंड में। उनका जीवन सत्य की खोज और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने की दिशा में था। वे तो पुरानी धार्मिक परंपराओं को मानते थे और ही किसी मंदिर या मस्जिद में श्रद्धा का प्रदर्शन करते थे। वे कहते थे:

"हमीं साईं, हमीं साहिब, हमीं रावन हमीं राम।

हमीं योगी, हमीं साधक, हमीं साक्षी, हमीं परमात्मा।।"

कबीर का व्यक्तित्व समाज को यह संदेश देता था कि सत्य का कोई एक रूप नहीं है, यह हर किसी के अनुभव और आस्था से जुड़ा हुआ होता है। उनका व्यक्तित्व समाज में व्याप्त पाखंड, धार्मिक भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ एक क्रांति था।

कबीर का कृतित्व

कबीर के कृतित्व में उनकी रचनाएँ, उनके दोहे, साखियाँ, तथा भक्ति गीत शामिल हैं। उनकी रचनाएँ भारत की संत कविता परंपरा का एक अनमोल हिस्सा मानी जाती हैं। कबीर की कविता सरल, सटीक और सहज थी। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने विचारों से अवगत कराया।

1. कबीर के दोहे

कबीर के दोहे अत्यंत प्रसिद्ध हैं और आज भी हर वर्ग के लोग उनका अनुसरण करते हैं। ये दोहे गहरे और जीवन के सत्य को उद्घाटित करने वाले होते थे। कबीर के दोहे समाज की विकृतियों पर प्रहार करते हुए आत्मज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाते थे। कुछ प्रसिद्ध कबीर के दोहे:

 

"दूसरों के दोष, सो अपनी ही कमी।

सच्चे को देखे, और झूठे से जमी।"

 

"बुरा जो देखूं, बुरा मैं कहूं,

बुरा जो देखूं, बुरा वही हूँ।"

 

इन दोहों के माध्यम से कबीर ने व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण करने की प्रेरणा दी।

 

2. साखियाँ

कबीर की साखियाँ भी बहुत प्रसिद्ध हैं। ये साखियाँ जीवन के सत्य, ईश्वर के प्रति भक्ति और समाज में व्याप्त धार्मिक असमानता के खिलाफ थीं। कबीर की साखियाँ बहुत सरल और सीधी होती थीं, लेकिन उनके भीतर गहरी शिक्षा छुपी रहती थी।

"पानी से उठ कर, जो आग लगाती है,

कबीर साक्षात् अग्नि, जलवा प्रेम का लाती है।"

3. भक्ति गीत

कबीर के भक्ति गीत उनके आत्मनिर्भरता और ईश्वर के प्रति निष्ठा को दर्शाते हैं। वे हमेशा यह कहते थे कि ईश्वर किसी एक धर्म या जाति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सर्वव्यापी हैं। उनके भक्ति गीतों में यह संदेश था कि प्रेम और भक्ति का कोई रूप नहीं है, यह केवल एक सच्ची अनुभूति है।

"राम नाम सुमिरन, राम काज सँवार।

सत्य की राह पे चल, पाई कोई हार।"

कबीर का समाज सुधारक दृष्टिकोण

कबीर ने केवल भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाया, बल्कि उन्होंने समाज के भीतर व्याप्त सामाजिक असमानता, जातिवाद और धार्मिक भेदभाव को भी चुनौती दी। उनके अनुसार, भगवान का कोई रूप नहीं होता, वह केवल एक आत्मा है जो सभी में व्याप्त है।

कबीर ने धार्मिक कट्टरता के खिलाफ कई बार अपनी आवाज उठाई। उनका कहना था कि किसी भी धर्म का असली उद्देश्य केवल ईश्वर की प्राप्ति और आत्मज्ञान होता है, कि किसी समुदाय या धर्म के बीच भेदभाव करना। वे कहते थे:

" माने बुरा, माने अच्छा,

बस तात परमार्थ और सेवा दिखा।"

कबीर ने अपने जीवन के माध्यम से समाज में शांति, समरसता और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने धर्म के नाम पर होने वाले संघर्षों को निराधार बताया और समाज में हर प्रकार की असमानता के खिलाफ आवाज उठाई।

कबीर का संदेश आज भी प्रासंगिक

कबीर का व्यक्तित्व और कृतित्व केवल उनके समय के लिए, बल्कि आज के समाज के लिए भी अत्यधिक प्रासंगिक है। आज भी उनकी कविताएँ, उनके दोहे, उनकी साखियाँ हमें सत्य, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश देती हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए धर्म, जाति और सम्प्रदाय की सीमाओं से परे जाकर हमें अपनी अंतरात्मा से जुड़ना चाहिए।

कबीर का यह गूढ़ संदेश केवल हमें व्यक्तिगत स्तर पर मार्गदर्शन देता है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एकता, समानता और भाईचारे का संदेश फैलाता है। उनके विचार आज भी हमारे समाज में जीवित हैं और हमें उनके कृतित्व से सीखने की आवश्यकता है।

कबीर का व्यक्तित्व और कृतित्व केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि एक जीवंत विचारधारा है जो समय के साथ और भी प्रासंगिक हो गया है।

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