Subah-Shaam Jaap Karne Wala Ek Shreshth Bhakti Mantra

भक्ति और ध्यान का जीवन में महत्व अत्यंत विशेष होता है। जो व्यक्ति नित्य सुबह और शाम भक्ति में समर्पित रहते हैं , उनका मन और विचार हमेशा शुद्ध और शांत रहते हैं। भक्ति और मंत्र - जाप एक ऐसे माध्यम हैं जो हमारे मन को शुद्ध करते हैं और हमें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। हिंदू धर्म में अनेक पवित्र मंत्र हैं जो भक्ति और शक्ति का प्रतीक हैं। इनमें से एक विशेष मंत्र है जो राम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है : " रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥"   यह मंत्र न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि जीवन के अनेक पहलुओं में शांति , समृद्धि और उन्नति प्रदान करता है। इस लेख में हम जानेंगे कि सुबह - शाम मंत्र जाप का महत्व क्या है , इसका विधि - विवरण क्या है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। मंत्र जाप का महत्व भगवान का नाम जपना एक ऐसी क्रिया है जो हमारे मन और जीवन को नई ऊर्जा से भर देती है। मंत्र जाप करने स...

Bharat Mein Kitne Brahman Saansad Hain? - Rajnitik Prabhav or Vartman Sthiti

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ विभिन्न जातियाँ, धर्म, भाषा और सांस्कृतिक विविधताएँ हैं। भारतीय राजनीति में इन विभिन्न समूहों का अपना महत्वपूर्ण स्थान है, और हर चुनाव में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व देखा जाता है। यही कारण है कि यह सवाल उठता है, "भारत में कितने ब्राह्मण सांसद हैं?" इस सवाल का उत्तर भारतीय राजनीति में ब्राह्मणों की भूमिका और उनके प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक है। इस लेख में हम इस सवाल पर विस्तार से चर्चा करेंगे और साथ ही ब्राह्मणों के राजनीतिक प्रभाव और उनके वर्तमान प्रतिनिधित्व पर भी प्रकाश डालेंगे।

भारतीय संसद की संरचना

भारत की संसद दो प्रमुख सदनों में बाँटी गई हैलोकसभा (लोकसभा) और राज्यसभा (राज्यसभा) लोकसभा में 545 सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है। राज्यसभा में 245 सदस्य होते हैं, जो विभिन्न राज्य विधानसभाओं और अन्य प्रतिनिधि संस्थाओं द्वारा चुने जाते हैं। दोनों सदनों में सांसदों का चुनाव विभिन्न जातियों, धर्मों, और वर्गों से होता है, और इन प्रतिनिधियों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

लोकसभा में सांसदों का चयन आम चुनावों के माध्यम से किया जाता है, जबकि राज्यसभा में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि चुनते हैं। इस प्रकार, भारत की राजनीति में सांसदों का प्रतिनिधित्व और उनका सामाजिक प्रभाव समय-समय पर बदलता रहता है।

ब्राह्मणों का भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक प्रभाव

ब्राह्मण समाज भारत के प्राचीनतम और सबसे सम्मानित समाजों में से एक रहा है। धार्मिक, सांस्कृतिक, और शैक्षिक मामलों में ब्राह्मणों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय राजनीति में भी ब्राह्मणों का प्रभाव लंबे समय से रहा है, और कई प्रमुख नेताओं ने भारतीय राजनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसे प्रमुख दलों में ब्राह्मण नेताओं का योगदान अविस्मरणीय रहा है।

ब्राह्मणों का समाज में ऐतिहासिक प्रभाव आज भी देखा जा सकता है, लेकिन भारतीय राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व समय के साथ घटा है। विशेषकर पिछड़े वर्गों और अन्य जातियों के लिए आरक्षण की नीतियों के लागू होने के बाद, ब्राह्मणों का राजनीतिक प्रभाव सीमित हुआ है। फिर भी, ब्राह्मण समाज के नेता कई बार सत्ता के केंद्र में रहे हैं और उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

लोकसभा और राज्यसभा में ब्राह्मण सांसदों की संख्या

ब्राह्मणों का भारतीय राजनीति में क्या स्थान है, इसे समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा में ब्राह्मणों की संख्या क्या है।

1. लोकसभा: लोकसभा में 2019 के आम चुनावों के बाद, ब्राह्मण सांसदों की संख्या लगभग 50 थी। यह संख्या ब्राह्मण समाज के लिए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है, हालांकि यह संख्या समय के साथ बदलती रहती है। यह संख्या चुनावों के परिणामों और विभिन्न राजनीतिक दलों के आधार पर घट-बढ़ सकती है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में इस समय ब्राह्मण नेताओं की संख्या अधिक है, लेकिन अन्य दलों में भी कई प्रभावशाली ब्राह्मण नेता हैं।

2. राज्यसभा: राज्यसभा में भी ब्राह्मणों की संख्या काफी महत्वपूर्ण रही है। राज्यसभा में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि होते हैं, और यहाँ भी ब्राह्मण नेताओं की उपस्थिति होती है। राज्यसभा में ब्राह्मण सांसदों की संख्या लगभग 30-35 के आसपास रही है, जो भारतीय राजनीति में उनके प्रभाव को दर्शाता है।

भारतीय राजनीति में ब्राह्मण नेताओं की भूमिका

ब्राह्मण नेताओं का भारतीय राजनीति में योगदान व्यापक रहा है। चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा, या फिर अन्य राजनीतिक दल, ब्राह्मण नेताओं ने भारतीय राजनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

1. भारतीय जनता पार्टी : भारतीय जनता पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की संख्या काफी महत्वपूर्ण रही है। भाजपा के कई प्रमुख नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, और उमा भारती ब्राह्मण समाज से आते थे। वर्तमान में भी भाजपा में ब्राह्मण सांसदों की संख्या महत्वपूर्ण है, जो पार्टी की नीति और दृष्टिकोण में योगदान दे रहे हैं।

2. कांग्रेस पार्टी: कांग्रेस पार्टी में भी ब्राह्मण नेताओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, और राजीव गांधी जैसे ब्राह्मण नेताओं ने भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की संख्या कुछ कम हो गई है, फिर भी पार्टी में कुछ प्रभावशाली ब्राह्मण नेता सक्रिय हैं।

3. समाजवादी पार्टी  और बहुजन समाज पार्टी : समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। इन दलों की राजनीति मुख्य रूप से समाज के पिछड़े और दलित वर्गों के लिए केंद्रित रही है, लेकिन इन दलों में भी कुछ प्रभावशाली ब्राह्मण नेता हैं, जो समाज के विकास के लिए काम कर रहे हैं।

ब्राह्मण सांसदों का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

ब्राह्मण सांसदों का भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव होता है। वे अक्सर समाज के उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, और सांस्कृतिक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कई ब्राह्मण सांसदों ने भारतीय राजनीति में समाज के अन्य वर्गों के लिए भी काम किया है। उनकी उपस्थिति संसद में केवल उनके समुदाय के लिए, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों के लिए भी फायदेमंद रही है।

हालांकि, ब्राह्मणों का राजनीतिक प्रभाव पिछले कुछ दशकों में घटा है, लेकिन फिर भी उनका योगदान राजनीति, शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहा है। वे अब भी भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और उनके सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रभाव विभिन्न चुनावों और सरकारी नीतियों पर देखा जाता है।

निष्कर्ष

भारत में ब्राह्मणों का राजनीतिक प्रभाव समय के साथ बदलता रहा है, लेकिन उनका प्रतिनिधित्व अब भी महत्वपूर्ण है। भारतीय संसद में ब्राह्मणों की संख्या हर चुनाव के साथ घटने-बढ़ने का अनुभव करती है। 2019 के चुनावों में ब्राह्मणों की संख्या लगभग 50 थी, जबकि राज्यसभा में यह संख्या 30-35 के आस-पास रही। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, और बहुजन समाज पार्टी जैसी प्रमुख पार्टियों में ब्राह्मण नेताओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, समाज के अन्य वर्गों के लिए आरक्षण की नीतियों के कारण ब्राह्मणों का राजनीतिक प्रभाव सीमित हुआ है, फिर भी उनका योगदान भारतीय राजनीति में अनमोल है।

ब्राह्मण सांसदों का प्रतिनिधित्व भारतीय राजनीति के एक अहम पहलू के रूप में हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा, और उनकी भूमिका आगामी चुनावों और नीतिगत फैसलों में अहम साबित हो सकती है।

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